Monday, June 29, 2020

LED का निर्माण कब और किसने किया था?

                  


 LED का निर्माण कब और किसने किया था?



एलईडी का पूरा नाम लाइट इमिटिंग डायोड है। यह रोशनी का मुख्य स्त्रोत है, साथ ही इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए भी काफी मददगार है। आज कल इसका उपयोग बहुत सारी तकनीकों में हो रहा है। 1968 में इसका पहला सफल निर्माण हुआ, हालांकि इसके बनने की प्रक्रिया 1927 से ही शुरू हो गई थी। सामान्य बल्ब वायर फिलामेंट की वजह से रोशनी देता है, जबकि सेमीकंडक्टर में इलेक्टिक करंट पहुंचने से एलईडी प्रकाशित होता है।

टेक्नोलॉजी  के जगत पर अब एलईडी का कब्जा है



आज अधिकांश तकनीकों में एलईडी का इस्तेमाल होता है। सामान्य लाइटिंग के अलावा कंप्यूटर, इंडिकेटर, एलसीडी टीवी, मोबाइल, लैपटॉप, एलईडी टीवी, कार व बाइक के हेडलैंप्स, स्ट्रीट लाइट, एक्वेरियम,  एविएशन लाइटिंग, सिग्नल, कैमरा, ट्रैफिक और अन्य कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इसका उपयोग किया जा रहा है।

इसके अलावा दिवाली के समय भी एलईडी से घर  को लोग रोशन करते है 
एलईडी की खासियत यह है कि ये सालों-साल तक चलता है। ऐसे में अगर आपने इसे एक बार खरीद लिया तो यह सालो साल चलेगी 

एलईडी से प्रदूषण भी नहीं फैलता। ऐसे में अगर आप एलईडी का इस्तेमाल करते हो तो तुम पर्यावरण को हरा-भरा रखने में भी मदद करोगे। 
कुछ रोचक बातें एलईडी के बारे में मर्करी वायु प्रदूषण का एक मुख्य कारण है। 

सीएफएल बल्ब में इसका इस्तेमाल होता है, इस वजह से इसे प्रदूषण का कारण माना जाता है। लेकिन एलईडी में हानिकारक मर्करी का उपयोग नहीं होता और यह ईकोफ्रेंडली है। 

सामान्य बल्ब से बिजली के झटके (शॉक) लग सकते हैं, लेकिन एलईडी से झटका नहीं लगता। इसमें शॉक रेसिस्टेंस पावर होता है। 

साधारण बल्ब से पांच गुना अधिक और सीएफएल बल्ब से भी काफी तेज रोशनी देता है एलईडी। 

एलईडी बल्ब 25 हजार घंटे से एक लाख घंटे तक आसानी से जलता है। यह इतना अधिक समय है कि सालों-साल तक अपनी रोशनी दे सकता है, जबकि सीएफएल बल्ब 10-15 हजार घंटे और सामान्य बल्ब मात्र एक से दो हजार घंटे तक जल सकता है। 

1970-80 के दशक में तैयार एलईडी हाल के कुछ वर्षों तक आसानी से काम करता रहा है। 

एलईडी बल्ब गर्म नहीं होता है, इसलिए इसे कूल लाइट भी कहा जाता है। 
दुनियाभर में इलेक्टिसिटी का 20 फीसदी रोशनी के लिए उपयोग होता है। अगर इन जगहों पर एलईडी का उपयोग शुरू हो जाए तो वह इसे घटाकर मात्र 4 फीसदी कर सकता है।


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