Thursday, March 12, 2020

आज के दौर में अपने गुस्से पे कैसे काबू पाये

कॉर्पोरेट कल्चर और वियस्थ जीवन  के दौर में हमारा स्वभाव बदलता जा रहा है हम अपने स्वभाव से अलग एक बनावटी दुनिया के सामने आ रहे हैं हमारे व्यवहार में स्वाधीनता कम और नाटक अधिक होता है अक्सर बाहरी दुनिया में किया गया नाटक जैसा व्यवहार हमारे स्वभाव में उतरने लगता है लोग दुनिया के सामने कुछ और होते हैं और अपने भीतर कुछ और कई बार बाहरी दुनिया का तनाव हमारे भीतर तक उतर आता है हमारा मूल स्वभाव कहीं खो जाता है हम अपनेपन में नहीं रहते कई लोग गुस्से का अभिनय करते हैं दफ्तर में मित्रों मित्रों और साथियों में कब गुस्सा करते करते उनका स्वभाव बन जाता है वह समझ नहीं पाते समय गुजरने के साथ ही व्यवहार बदलने लगता है हमेशा प्रयास करें कि दुनियादारी की बातों में आपका अपना स्वभाव कहीं छूट ना जाए आप जैसे हैं अपने आपको वैसा ही कैसे रखें इस बात को समझने के लिए थोड़ा ध्यान में उतरना होगा हम कभी कभी क्रोध करते हैं लेकिन क्रोध हमारा मूल स्वभाव नहीं है क्या किया जाए कि बाहरी अभिनय हमारे भी तरह हो पहले व्यवहार में आता है फिर हमारा स्वभाव बन जाता है स्वभाव में आया तो सबसे पहले वह हमारी सोच को खत्म करता है फिर संवेदना को मारता है हो जाती है इसको अपने स्वभाव में उतरने से कैसे रोका जाए बाहरी दुनिया को बाहर ही रहने दें भारी दुनिया का अंतर होना चाहिए

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