Tuesday, March 31, 2020

क्या २५०० लोग भारत की राजधानी को देहलाना चाहते थे ??

जो निजामुद्दीन इलाके मे हुआ किया यह लापरवाही है या जानबूझ कर की गयी गलती है, अगर यह लापरवाही तो इस मे कौन कौन लोग शामिल है और अगर ,इसमे लोग शामिल थे तो वो आखिर चाहते क्या थे , किआ स्थानीय प्रशासन की इस मे मिली भगत है , क्या थोड़े से पैसे के लिए कोई कुछ भी कर सकता है , आखिर वो लोग भारतीयों को सुरक्छित क्यों नहीं देखना चाहते ऐसे बहुत सारे सवाल  जेहन मे है पर मुझे नहीं लगता की किसी के पास इसका जवाब होगा पर यह सोचने की बात जरुरु है की कोई हमे खुश नहीं देखना चाहता पर ऐसा क्यों , क्योकि भारत एक पावरफूल  बनने देश बनने जा रहा है ।


पर चौंकाने वाली बात यह है कि निजामुद्दीन इलाके के कुछ लोगों में 2 दिनों से कोविड-19 बीमारी के लक्षण दिख रहे थे। स्थानीय प्रशासन को भनक लगी तो संदिग्धों को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस भी भेजी गई, लेकिन इलाके को लोगों ने पुरजोर विरोध करते हुए एंबुलेंस लौटा दी।
निजामुद्दीन  ड्रोन  से  नज़र  


२५०० लोगो का समूह कम नहीं होता , जब देश-समाज संकट में हो तो समाधान का सहभागी बनने से बड़ा धर्म और क्या हो सकता है? लेकिन देश में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने धार्मिक कठमुल्लेपन के कारण कोरोना के महासंकट को जाने-अनजाने और चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं। इन लोगों ने दिल्ली के निजामुद्दीन को देश का नया कोरोना हॉटस्पॉट बना दिया। यहां न केवल तबलिगी जमात के धार्मिक कार्यक्रम में सैकड़ों लोग शामिल हुए, बल्कि इलाके के लोगों ने भी कोरोना के खतरे के मद्देनजर सतर्कता और सोशल डिस्टैंसिंग की अपील को बिल्कुल ठेंगा दिखा दिया।
दिल्ली (दिलशाद गार्डन और निजामुद्दीन) समेत जिन प्रदेशों में दो-दो कोरोना हॉटस्पॉट्स पाए गए हैं, उनमें केरल (कासरगोड़ और पथनामथिट्टा), उत्तर प्रदेश (नोएडा और मेरठ) और महाराष्ट्र (मुंबई और पुणे) शामिल हैं। वहीं, राजस्थान और गुजरात में एक-एक शहर (क्रमशः भिलवाड़ा और अहमदाबाद) को कोरोना हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है।

यह भी सोचने वाली बात है की आखिर वहां के  लोगो ने एंबुलेंस को क्यों वापस कर दिया था
चौंकाने वाली बात यह है कि निजामुद्दीन इलाके के कुछ लोगों में 2 दिनों से कोविड-19 बीमारी के लक्षण दिख रहे थे। स्थानीय प्रशासन को भनक लगी तो संदिग्धों को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस भी भेजी गई, लेकिन इलाके को लोगों ने पुरजोर विरोध करते हुए एंबुलेंस लौटा दी। उनकी आखें तब खुलीं जब मामला नियंत्रण से बाहर जाने लगा। जब नए-नए मामले सामने आने लगे तब जाकर लोगों ने पुलिस और डॉक्टरों की टीम को सहयोग करना शुरू किया। अब पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या जानबूझकर इतने लोगों के एक जगह होने की बात छुपाई?

न्यूज़ से पता चल रहा है की इस मरकज में लॉकडाउन के बाद करीब 2,500 लोग जमा थे जिनमें सैकड़ों विदेशी भी थे। इनमें से अब तक 860 लोगों को अस्पतालों में भर्ती किया जा चुका है जबकि 300 और लोग भी अस्पताल भेजे जाने हैं।





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